अकेलापन(loneliness)
आज अपने आपको ढूंढने निकला तो बहुत खोया हुआ पाया ख़ुद को यहाँ।हवा के अलावा कोई नहीं यहाँ।
अब तो चाँद तारे के अलावा कोई अच्छा ही नहीं लगता। शायद अब अकेलापन भी मुझसे परेशान हैं।
कामयाबी के भीड़ मे खो सा गया हूँ। बहुत सारे अपने छूट चूके हैं। ना कोई दर्द सुनने वाला हैं और ना ही खुशी सुनाने वाला।
सुबह उठने से लेकर काम मे व्यस्त रहते हुए शाम तक सब अच्छा चलता हैं। लेकिन शाम के बाद दर्द बढ़ने लगती हैं और मध्य रात्रि तक यह दर्द असीमित हो जाती हैं।
कुछ पुरानी यादें, कुछ कसमे सब याद आने लगते हैं। इस समय उल्टा होता हैं और अकेलापन मुझपे हावी होने लगता हैं।
मैं मानता हूँ कि माँ-बाप और तकिये के अलावा जिंदगी का सच्चा हमदर्द कोई नहीं होता।
जब आपको कोई बोले ना आप दुनिया के सबसे अच्छे आदमी हो तो इसे झूठला दीजियेगा। क्यों कि जिंदगी में सबसे ज्यादा दर्द यही देते हैं।
पैसा और दोस्ती के बीच लडाई थी,मुझे पुरा विश्वास था कि मैं जीत जाऊंगा। लेकिन मैं गलत था और मैं हार गया।इस दिन को में जिंदगी भर नही भूल सकता।
---मुसाफिर कल भी था
मुसाफिर आज भी हूं
कल अपनो कि तलाश थी
आज अपनी तलाश हैं।

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